
मेड़तारोड: धनतेरस पर तालाब से मिट्टी लाने की अनोखी परंपरा आज भी जारी
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हमारे मेड़ता संवाददाता के अनुसार, मेड़तारोड में शुक्रवार को धनतेरस का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बाजारों में खरीदारी के लिए लोगों की भारी भीड़ देखी गई। वहीं, ग्रामीण अंचल में आज भी धनतेरस के दिन तालाब परिसर से मिट्टी को धन के रूप में लाने की एक अनूठी परंपरा निभाई जा रही है। यह परंपरा भारतीय संस्कृति और रीति-रिवाजों की गहराई को दर्शाती है।
धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व दिवाली उत्सव के आगमन का प्रतीक है। इस दिन धन और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी और आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई कोई भी वस्तु शुभ मानी जाती है और उसमें वृद्धि होती है। इसी मान्यता के चलते लोग सोना, चांदी, बर्तन और अन्य घरेलू सामान खरीदते हैं।
परंपरा का महत्व
मेड़तारोड के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में धनतेरस के अवसर पर तालाब से मिट्टी लाने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। ग्रामीण मानते हैं कि इस मिट्टी में अलौकिक शक्ति होती है और इसे घर लाकर पूजा स्थल पर रखने से धन-धान्य की वृद्धि होती है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और लोग इसे बड़े श्रद्धा भाव से निभाते हैं। इस मिट्टी को 'धन' के रूप में लाकर घर के मुख्य द्वार पर या पूजा घर में स्थापित किया जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और समृद्धि आती है।
बाजारों में रौनक
धनतेरस के अवसर पर मेड़तारोड के बाजारों में दिनभर चहल-पहल बनी रही। सराफा बाजार, बर्तन भंडार और इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ देखी गई। लोगों ने अपनी सामर्थ्य अनुसार सोने-चांदी के सिक्के, गहने, नए बर्तन, वाहन और अन्य उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी की। दुकानदारों के चेहरों पर भी इस पर्व के कारण खुशी का माहौल था। इस पर्व को लेकर लोगों में विशेष उत्साह देखा गया, जिसने बाजार को एक नई ऊर्जा प्रदान की।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।