
धनतेरस 6 को, हस्त नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग में खरीदारी शुभ
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार...
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर 6 नवंबर को धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा। इस वर्ष धनतेरस के अवसर पर कई शुभ योगों का विशेष संयोग बन रहा है, जो खरीदारी और पूजन के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगे। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस दिन मालव्य राजयोग, शुक्र प्रदोष योग, विष्कुंभ योग और हस्त नक्षत्र का प्रभाव रहेगा।
शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस शुभ दिन पर हस्त नक्षत्र, त्रिपुष्कर और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संगम खरीदारी को विशेष फलदायी बनाएगा। धनतेरस पर पूजा के लिए प्रदोष काल का समय सबसे उत्तम माना जाता है। इस वर्ष यह अवधि शाम 5:49 बजे से रात 8:23 बजे तक रहेगी। इस विशेष समय के दौरान श्रद्धालु भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकेंगे। भक्तजन सुख-समृद्धि, धन-धान्य और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हुए अनुष्ठान करेंगे।
धनतेरस का महत्व और पौराणिक कथा
धनतेरस को धन त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लिए प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद का प्रवर्तक और आरोग्य का देवता माना जाता है। उनके द्वारा धारण किया गया अमृत कलश जीवन की रक्षा और अमरत्व का प्रतीक है। इसी कारण धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से भक्तों को स्वस्थ जीवन और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। श्रीमद्भागवत पुराण के अष्टम स्कंध में समुद्र मंथन से संबंधित विस्तृत कथा का वर्णन मिलता है।
दिवाली और संबंधित पर्वों की तिथियाँ
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष दीपावली का पर्व 8 नवंबर को मनाया जाएगा। अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:21 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन, 9 नवंबर को दोपहर 12:25 बजे तक रहेगी। विशेष ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 8 नवंबर की शाम को प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होने और दीपावली का पर्व रात्रि में होने के कारण इसी दिन मां लक्ष्मी का पूजन किया जाएगा। वहीं, 9 नवंबर, सोमवार को अमावस्या तिथि पर स्नान-दान का विशेष महत्व रहेगा।
गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव
चूंकि अमावस्या तिथि दो दिन तक प्रभावी रहेगी, इसलिए गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव की तारीखों में कुछ भिन्नता देखने को मिलेगी। शहर के कुछ मंदिरों में 9 नवंबर को गोवर्धन पूजा का आयोजन किया जाएगा, जबकि अन्य मंदिरों में यह उत्सव 10 नवंबर को मनाया जाएगा। शहर के प्रमुख बंशीवाला मंदिर में अन्नकूट के दर्शन 10 नवंबर को शाम 7 बजे भक्तों के लिए उपलब्ध होंगे।
- धनतेरस: 6 नवंबर, शुक्रवार
- शुभ योग: मालव्य राजयोग, शुक्र प्रदोष योग, विष्कुंभ योग, हस्त नक्षत्र, त्रिपुष्कर योग, सर्वार्थ सिद्धि योग
- प्रदोष काल (धनतेरस पूजा): शाम 5:49 बजे से रात 8:23 बजे तक
- दिवाली पूजन: 8 नवंबर, सोमवार (प्रदोष काल में)
- अमावस्या तिथि: 8 नवंबर सुबह 11:21 बजे से 9 नवंबर दोपहर 12:25 बजे तक
- स्नान-दान (अमावस्या): 9 नवंबर, सोमवार
- गोवर्धन पूजा/अन्नकूट: 9 या 10 नवंबर (मंदिरों के अनुसार भिन्न)
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नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।